फतहसागर और राजीव गांधी पार्क सहित प्रमुख स्थलों के एक्सेसिबिलिटी ऑडिट की मांग
उदयपुर को अधिक समावेशी और दिव्यांग-अनुकूल शहर बनाने की दिशा में अर्थ डायग्नोस्टिक्स के सीईओ, पैनेशिया डिसएबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स (PDRA) के संस्थापक एवं अध्यक्ष तथा तीन बार के वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. अरविंदर सिंह ने सार्वजनिक एवं पर्यटन स्थलों पर सुगम सुविधाओं को मजबूत करने की मांग उठाई है। डॉ. अरविंदर सिंह के नेतृत्व में पैनेशिया डिसएबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स के प्रतिनिधिमंडल ने उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) के सचिव राजपाल सिंह (आरएएस) को ज्ञापन सौंपकर फतहसागर, राजीव गांधी पार्क सहित शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर पहुंच संबंधी कमियों को दूर करने का आग्रह किया।
यह पहल उदयपुर में दिव्यांग अधिकार और सार्वजनिक स्थलों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने रखती है।
फतहसागर और राजीव गांधी पार्क में सुविधाओं की समीक्षा
स्थल निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को ज्ञापन के माध्यम से यूडीए के समक्ष रखा गया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं और चलने-फिरने में कठिनाई वाले नागरिकों के लिए कई आवश्यक सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
ज्ञापन में मानक रैंप, बाधारहित मार्ग, कर्ब कट, दिव्यांग अनुकूल शौचालय, आरक्षित पार्किंग, स्पष्ट संकेतक और प्रशिक्षित सहायता व्यवस्था जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
सार्वजनिक स्थलों तक पहुंच को बताया वैधानिक अधिकार
डॉ. अरविंदर सिंह ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों तक समान और सुरक्षित पहुंच दिव्यांग जनों के लिए कोई विशेष सुविधा नहीं है, बल्कि दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत प्रदत्त वैधानिक अधिकार है।
उन्होंने कहा कि उदयपुर एक प्रमुख पर्यटन शहर है और यहां के सार्वजनिक एवं पर्यटन स्थलों को विकसित करते समय दिव्यांग नागरिकों की पहुंच और आवश्यकताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। सुगम बुनियादी ढांचा दिव्यांग नागरिकों को सार्वजनिक स्थानों का अधिक स्वतंत्र और सुरक्षित रूप से उपयोग करने में सक्षम बनाता है।
शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों का एक्सेसिबिलिटी ऑडिट कराने की मांग
डॉ. अरविंदर सिंह ने यूडीए से राजीव गांधी पार्क, फतहसागर सहित उदयपुर के अन्य प्रमुख पार्कों, पर्यटन स्थलों और सार्वजनिक परिसरों का एक्सेसिबिलिटी ऑडिट करवाने की मांग की।
उन्होंने ऑडिट में सामने आने वाली कमियों के आधार पर समयबद्ध सुधार कार्ययोजना लागू करने का भी आग्रह किया, ताकि सार्वजनिक स्थलों पर मौजूद पहुंच संबंधी बाधाओं को चरणबद्ध तरीके से दूर किया जा सके।
उन्होंने कहा कि शहर के विकास में सुगमता को शुरुआत से ही शामिल किया जाना चाहिए, ताकि दिव्यांग नागरिकों को बाद में अलग से सुविधाएं उपलब्ध कराने के बजाय सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को ही अधिक समावेशी बनाया जा सके।
समावेशी उदयपुर की दिशा में पहल
इस पहल का उद्देश्य उदयपुर के सार्वजनिक और पर्यटन स्थलों को ऐसे वातावरण में विकसित करने की आवश्यकता को सामने लाना है, जहां दिव्यांग नागरिक भी समान रूप से पहुंच और सुविधाओं का उपयोग कर सकें।
उदयपुर में दिव्यांग अधिकार सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक स्थलों की पहुंच संबंधी कमियों की पहचान और उनके समयबद्ध समाधान पर ध्यान देना आवश्यक है। एक्सेसिबिलिटी ऑडिट इस दिशा में आवश्यक सुधारों को चिन्हित करने में मदद कर सकता है।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में सत्येन्द्र सिंह पंवार, प्रवीण कुमार शर्मा, कनिका कल्याण और डिम्पल सुहालका शामिल थे।
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